आगे बढ़ पथिक तेरी रौशन है राहें ,
दूर कहीं बुला रहीं है फ़िर वही बाहें ,
रुकना क्या अब झुकना क्या ,
पर्वत आए या दरिया या मिले काटे मुझको
.
सांसे तेज और पैर लथपथ तो क्या ,
जीवन डगर पर पद चिह्न छोड़ते जाएंगे ,
पाएंगे जो पाना है जाएँगे जहाँ जाना है ,
अब ख़ुद पे भरोसा है मुझको
.
दिल के अरमान जगे हैं हम भी आगये आगे है ,
बांटने होठों की हँसी सबको ,
रात लम्बी तो क्या और काली तो क्या ,
बुला रहा है कल का सूरज मुझको
.
रास्ता लंबा तो क्या काम ज्यादा है ,
जिंदगी छोटी है बड़ा इरादा है ,
अब बैठने की फुर्सत कहाँ है मुझको ,
कैद करके नज़ारे उनको दिल में बसाके ,
बढ़ता हूँ आगे हीं आगे करता सलाम सबको ,
पकड़ के हाथ मेरा कुछ देर साथ चलो यारो ,
पर अब रुकने के लिए ना कहो मुझको
Nishikant Tiwari
Ads 468x60px
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Aab mai kaya kahu ? हो जज़्बात जितने हैं दिल में, मेरे ही जैसे हैं वो बेज़ुबान जो तुमसे मैं कहना न पाई, कहती हैं वो मेरी ख़ामोशियाँ सुन स...
-
नभ को काले बादलों ने घेर लिया था | दिन भर की गर्मी के बाद मौसम थोड़ा ठंडा हो गया था | मैं हमेशा की तरह अपने छत पर संध्या भ्रमण कर रहा था ...
-
A Lost Love (short story) . . . Is Love Blind ? ... .. . God when the dreams come true when the sky is full of stars and basket full of fl...
-
शाम सवेरे तेरे बांहों के घेरे , बन गए हैं दोनों जहाँ अब मेरे क्या मांगू ईश्वर से पा कर तुझे मैं क्या सबको मिलता है ऐसा दीवाना फिर लौट...
वाह, रॉबर्ट फ़्रॉस्ट की कविता की याद दिला दी!
ReplyDeleteThe woods are lovely dark and deep, but I have promises to keep...
आप तो बड़ी सम्भावनाओं वाले व्यक्ति हैं! बहुत शुभ कामनायें.