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बस एक मौका

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रूठी तो कई बार थी मुझसे ,
पर इतना दर्द तो ना होता था ,
जिस प्यार की खातिर किये कितने समझौते ,
वो प्यार खुद में एक समझौता था |

दूर होके वो मुझसे कितनी खुश है ,
पहले तो यकीं नहीं होता था ,
टूटे सपनो की चीखें सोने नहीं देतीं ,
उसके अदाओं में खोया पहले भी कहाँ सोता था |

उस घर के आते हीं मेरे कदम तेज हो जाते हैं ,
जिसकी खिड़की पर मैं घंटों खड़ा होता था ,
संभाल लेता खुद को जब पहली बार उसे देखा था ,
पास मेरे बस वही एक मौका था |

Nishikant