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Showing posts from October, 2008

कि दर्द हीं दिल का दवा बन गया है

ख्यालों काकुछऐसासमांबंधगयाहै ,
कि दर्द हींदिलकादवाबनगयाहै ,
सपने बिखर रहेबनकेरेतहाथोंसे ,
जोबचाथा , कुछधुंवाकुछहवाबनगयाहै |

मंजीलेंथींमेरीतेरेआसपास ,
परजिस पेसाथचलतेथेवोरासताकिधरगया ,
जोनाडरताथाज़मानेमेंकिसीसे,
आजख़ुदक्योंअपनेआपसेडरगया |

क्योंयेजाननाज़रूरीथाकीकौनसही , कौनग़लतहै,
अबदूरहोकरक्योंपासआनेकीतलबहै,
फ़िरसेपुरानींगलतियोंको दोहराने कोजीचाहताहै ,
बदलेकीआरजूहैयाप्यारकीकशीशहै |

तुमहींरुकजाओकीवक्ततोरुकतानहीं ,
क्योंयेपर्वत