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Thursday, August 16, 2007

परलोक में परिलोक

एक बार मैं मर कर परलोक गया
परलोक क्या परिलोक गया
देखा अप्सराएँ नाच रहीं है
इन्द्र व अन्य देवगण सोमरस का पान कर रहे थे
मै भी रुप रस का प्याला पीकर नाच उठा
घूमते घूमते मुझे इन्द्र मिले
बोले स्वर्ग में आपका स्वागत है
तो कैसा लगा स्वर्ग ?
अच्छा है पर धरती सा नहीं है ।
देखिए आप स्वर्ग का अपमान कर रहे है
यहाँ अप्सराएँ है,सोम रस है,चारो ओर सुख का माहौल है
वहाँ क्या है?
मैं बोला - अप्सराएँ तो धरती पर इतनी है कि स्वर्ग में अटे हीं नहीं
पता नहीं कब से एक हीं जैसा नृत्य और सगींत में डुबे हुए है
धरती पर तो हर तीन महीने में फैशन बदल जाता है
सोमरस छोड़िए वहाँ तो बियर, विस्की, शेम्पेन ,रम ,दारू
और हाँ ताड़ी भी तो मिलती है
स्वर्ग में सुख का नहीं भय का माहौल है
आप दानवों को पराजित करने के लिए धरती से
कुछ आधुनिक हथियार क्यों नहीं ले लेते ।

क्या आपने माँ के गोद में बैठ कर दुध भात खाया है ?- नहीं
क्या आपकी माँ ने आपको लोरी गा के सुलाया है ?- नहीं
क्या आपने लड़कियों को लड़को के वस्त्र में देखा है ?- नहीं
क्या आपको मालूम है पहला प्यार क्या होता है ?- नहीं
धरती पर तो चित्र तक चलते है
प्यार से हम उसे सिनेमा कहते है
वहाँ तो चैरासी प्रकार के प्राणी रहते है,यहाँ कितने है ?
अ..ब.......
धरती तो नीच से नीच का भी भार वहन करती है
पुत्र भले कुपुत्र हो जाए माता कुमाता कैसे हो सकती है ।
यह सब सुन कर इन्द्र बोल उठे-काश मैं भी मनुष्य होता
काश मैं भी धरती पर रहता !

तभी एक दूत ने दी आवाज़ चलो तुम्को बुला रहे है यमराज
यमराज बोले हे नर आप समय से पहले हीं गए हैं मर
अतः धरती पर लौट जाँए कृपा कर
जिस दूत ने इसके प्राण हरे है उसे दुगने कोड़े लगाए जाए
मैने पूछा - दुगने कोड़े क्यों ?
पहली गलती तो यह कि तुम्हें असमय हीं मारकर लाया है
दुसरी गलती यह कि तुम्हारे जैसे पापी को नरक ले जाने
के बजाए स्वर्ग ले आया है
सबको अलविदा कहकर वापस शरीर में आ गया
और बैठ गया उठ कर
माँ बोली-कितने देर से जगा रही थी
उठ क्यों नहीं रहे थे इतने देर से मर रहे थे क्या
हाँ पर आपको कैसे पता !!!

Nishikant Tiwari

4 comments:

Himanshu Shekhar (seo-in-india) said...

क्या बात है ,निशिकान्त जी आपकी कविताओ को पदने मे बहुत आनन्द आत है। कितनी सत्य बातो को आने इतने सरल अन्दज़ मे लिख है। अतिउत्तम।
लगे रहो।

Anonymous said...

kay baat hai sir parlok mein parilok mein apne kya baat keh di sach maaza aa gaya this is my first in ur poems world aj se hum apke fan ho gaye sir ji mein bhi ek chota sa poet hu me apko ek poem bhejuga this is my id sir ji vinodpal_21@yahoo.in

Asheesh said...

Hii Nishikant, Today i was seraching something new that can give me some entertainment.Its my goodluck that i found ur website of such sweet poems.I read some poems,really those are very funny and interesting.Good Wishes for u and keep it up..

Hindi Choti said...


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