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Thursday, August 16, 2007

प्यार बचपन का


रात बहुत हो चुकी है,
पर आँखो में नींद नहीं है,
कहती हैं उसका चेहरा देखे बिना सोना नहीं है,
क्या करूँ मैं बड़ी मुश्किल घड़ी है,
आफ़त मेरे सर पे खड़ी है,
रात भर यूँ हीं बैठा रहा मैं,
कैसे कह दूँ क्यों आखे सोई नहीं है ।
.
सुबह जब मैं बस स्टाप पहुँचा बस जा चुकी थी,
मेरी धड़कने मुझे हीं धिक्कार रहीं थी,
तभी आई वो और रोने लगी,
चलो मैं स्कुल छोड़ दूँ,
कोई बात नहीं जो बस छुट गई,
स्कुल उतर कर थाइक्यू बोली और हाथ मिलाया,
क्या हम कहे की कितना मज़ा आया ।
.
दिन भर उसके इन्तज़ार में धुप में खड़े रहे उसके प्यार में,
पर छुट्टी हुई तो और जल गए हम,
एक लड़के के साथ निकली वह बेशरम,
एक दुजे के गले में था हाथ लगाया,
दिल पर ऐसी बिजली गिरी की शाम तक होश ना आया,
तभी खोजते खोजते पहुँचा मेरा भाई,
बोला भैया जल्दी चलो मम्मी ने है तुम्हें फ़ौरन बुलाया ।


Nishikant Tiwari

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