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Wednesday, September 5, 2007

पवन भँवरा टकरार

पवन ने क्या कह दिया झुक गईं शर्म से सारी कलियाँ
भुन भुनाने लगा भँवरा देने लगा गालियाँ
उसकी बीबी तो एक भी नहीं बस सालियाँ हीं सालियाँ ।
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पवन: अरे ओ आवारा भँवरा, रस चूसने वाला
बुरी नज़र वाले तेरा तो मुँह हीं नहीं सारा बदन काला
नशे में झुम रहा शराबी,शर्म नहीं आती तुम्हें ज़रा भी
दिन रात फुलों के बीच रहकर
तू उनकी ही सुगंध में सड़ रहा है
भगवान तुम्हें बचाए ना तू जी रहा है ना मर रहा है ।
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भँवरा: जो भी रास्ते में आए, या तो झुका दे या फीर तोड़ दे
कलियों फिर तुम्हारी बहियाँ कैसे छोड़ दे
उड़ा दे सारी पंखुड़ी एक पल में कर दे जवान से बुढी
यह पवन है पावन नहीं
इसमे बस भरा है अवगुण भुन भुन भुन भुन....................
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पवन
: काले कलुठे भँवरे तुझ पर तो कोई रिझती नहीं
फिर क्यों कभी सिटी मारता कभी गाना गाता है
जा बेवकूफ़ो की लाइन में खड़ा हो जा
क्यों लाइन मारता है ।
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भँवरा: हर कली तू बनना चाहता यार है
शायद मानसिक रुप से बीमार है
कहाँ कहाँ कितने जूते खाएँ हैं
पर तू फिर भी आदत से लाचार है ।
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कलि: क्यों लड़ रहे हो इनसानों की तरह
कच्छा पहन अखाड़े में खड़े पहलवानों की तरह
जहाँ पवन ना बहे और भँवरा ना गाए
उस बगिया में कौन आएगा
तुम दोनो यूँ लड़ते रहे तो मुझसे दिल कौन लगाएगा ?
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पवन: पीछे हट जा भँवरे अब मेरी बारी है
भँवरा: नहीं इससे मेरी पहले से यारी है
तन गए दोनो फिर खरी खोटी सुनाने की तैयारी है
जंग पहले भी ज़ारी थी जंग अब भी ज़ारी है ।


Nishikant Tiwari

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