कल तुम भी ज़रुर आना निलामी होगी मेरे ज़ज़बात की,
सरे बाज़ार किमत लगेगी मेरे हालात की,
बाँध खड़ा किया जाएगा मुझे चौराहे पर,
सबकी निगाहें होंगी मेरे निगाहों पर,
सावन में पूछ क्या हो आसुओ की बरसात की,
कल तुम भी ज़रुर आना निलामी होगी मेरे ज़ज़बात की ।
.
इन्सानो ने बनने दिया इन्सान तो क्या,
खुद अपने हीं घर में बन गए मेहमान तो क्या,
दिल में दर्द और होठों पर मुस्कान नहीं,
खुद पर शर्मींदा हूँ औरो से परेशान नहीं,
मुझे समझ हीं ना थी दुनिया के इस खुराफ़ात की,
कल तुम भी ज़रुर आना निलामी होगी मेरे ज़ज़बात की ।
Nishikant Tiwari
Ads 468x60px
Saturday, September 8, 2007
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Aab mai kaya kahu ? हो जज़्बात जितने हैं दिल में, मेरे ही जैसे हैं वो बेज़ुबान जो तुमसे मैं कहना न पाई, कहती हैं वो मेरी ख़ामोशियाँ सुन स...
-
हर शाम जब भी मैं छत पे टहलने जाता उसे सामने की छत पे मटकते पाता कभी शर्मा के देखती, कभी देख के शर्माती किताब लि...
-
Comedy Poems टकला नया फैशन शादी के बाद बहुत कुछ होता है मच्छरजी महाराज पत्नी बनी सजनी दुगना मर्द सच्चा देश भक्त परलोक...
-
इतना सोच समझ के कब तक चलेंगे खुद से बच के क्यों न फिर बेपरवाह हो जाएँ एक दूजे में फिर से खो जाएंं । थोड़ा इठला के शर्मा के थोड़ा मुस...
No comments:
Post a Comment