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Tuesday, July 24, 2007

तेरे हाथो मिट जाने


पल भर तो पास बैठो मेरे, तुम्हें जी भर के देख लेने दो,
तेरी आँखो का नूर हीं मेरे जिने का सहारा है,
तेरी बेवफ़ाई से कोई शिकवा भी नही,
उसी को अपना समझे जो ना कभी हमारा है,
चाहे वफ़ा मिले या सज़ा इस दीवाने को,
हम तो आए है तेरे हाथो मिट जाने को ।

पछ्ताए हुए खड़े है तेरी पनाहों में,
ठुकड़ा दो मुझे या बसा लो निगाहों में,
नमी सी जो दिखती है इन साँसों में,
क्या करूँ आती नही बेशर्म सी ईन आँखो में,
सज़ा दो इन्हें अपनी चौखट पर हीं टीक जाने दो,
हम तो आए है तेरे हाथो मिट जाने को ।

तुम चाहो ना चाहो, तुम्हारी मर्ज़ी है,
फिर भी तुम्हे चाहेंगे,मेरी खुदगर्ज़ी है,
मेरा दिल तोड़ दो या बाहों में भर के प्यार करो,
तुम्हे हक है मुझसे नफ़रत या प्यार करो,
फूल खिलते है ,खिल के मुरझाने को,
हम तो आए है तेरे हाथो मिट जाने को ।

छाया है जो नशा उसे और भी बढ जाने दो,
चाहे तो दे दो बाहों का सहारा या मदहोशियों में गिर जाने दो,
दहलीज दिल की लाँघ आए , सुनाने मोहब्बत के फ़साने को,
बना के राज़ छुपा लो इसे सीने में,
या खुल के बता दो ज़माने को,
हम तो आए है तेरे हाथो मिट जाने को ।

क्या सही , क्या गलत मै नही जानता,
जानता हूँ तो बस ईतना कि तुम्से मोहब्बत किया करता हूँ,
तेरी आँखे के शरारे को दिल में बसाकर,
अपनी धड़कनो से शरारत किया करता हूँ ,
मेरी दुनिया को अपने बाहों के घेरे तक सिमट जाने दो,
हम तो आए है तेरे हाथो मिट जाने को ।

कल जो थी चिंगारी,बन के शोला लगी है जलाने में,
पल भर में लगती है,जन्मों लगते है बुझाने में,
हम अकेले नही इस ज़माने में ,कितने लगे है रिझाने में,
जो टीस रही थी दिल में कबसे,सालों लगे बताने में,
अब चाहे बंद कर लो दरवाज़े या मेहफिल में आ जाने दो,
हम तो आए है तेरे हाथो मिट जाने को ।

Nishikant Tiwari

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