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Saturday, October 8, 2011

शालिनी को प्रेम पत्र

क्या सभी लड़के एक जैसे होते है ? शायद नहीं | पहले मैं भी यही सोचता था क्योंकिं मैं खुद को दूसरो से अलग मानता था |अपनी तारीफ़ कौन नहीं करता |मेरे अंदर वो छिछोरापन नहीं जो किसी भी लड़की को देखते हीं उछंक्रिलता पर उतर जाए |मैं सभी लड़कियों की इज्ज़त करता हूँ और शायद हीं कभी अपनी मर्यादा का उलंघन करता हूँ |यही सोच के सुमित ने मेरी आपसे जान-पहचान कराई थी |वह इतनी दूर अमेरिका में है और आप दिल्ली में |आपका ख्याल नहीं रख सकता तभी तो उसने मेरी आपसे दोस्ती कराई ताकि आपको कोई परेशानी या समस्या होतो आपकी मदद कर सकूँ | उसे मुझ पर पूरा भरोसा था और मुझे अपने आप पर भी लेकिन आपसे इतना घुल मिल जाने के बाद मेरा अपने आप से भरोसा उठने लगा है | अब मैं क्या कहूँ ,आपसे यह सब कहते हुए बड़ा संकोच हो रहा है पर कहना ज़रूरी है | धीरे-धीरे आपका नशा दिलोदिमाग पर इस तरह से छा गया है कि लाख नहीं चाह कर भी मन आपके बारे में हीं सोचता रहता है | आपके साथ बिताये एक-एक पल को रात रात भर जाग केर याद करता रहता हूँ |जब भी मोबाइल की घंटी बजती है ,लगता है आप हीं का फ़ोन है | आप कहा करती थी ना कोई भी लड़का आपका दोस्त बन कर नहीं सकता उसे आपसे प्यार हो ही जाता है | हाँ आप सही थीं | आप जितनी हीं खुबसूरत है उतना हीं खुबसूरत है आपका स्वभाव | आपके व्यक्तित्व का आकर्षण हीं ऐसा है कि कोई खींचे बिना नहीं रह सकता | दीवाना बन हीं जाता है | मुझे अपनेआप पर भरोसा था गुरुर की हद तक पर अब तो मुझमें आप हीं आप हैं मैं ना जाने कहाँ खो गया | समझ में नहीं आता की इल्जाम किस पर लगाऊं, अपने आप पर या आपकी अदाओं पर |

आपको यह सब पढ़ के बहुत दुःख पहुंचा होगा और मुझे भी बहुत बुरा लग रहा है पर मैं क्या करूं ? मुझे गलत मत समझिये |मैं आपसे कुछ मांग नहीं रहा हूँ | बस इतनी गुजारिश है कि मुझसे मेल जोल बंद कर दीजिये | मैं नहीं चाहता कि ये प्यार का अंकुर एक वृक्ष बन जाए जिसे उखाड़ना मुस्किल हो |
पर कोई भी समस्या या चिंता हो तो मुझे ज़रूर याद कीजियेगा | मैं सदैव आपके साथ हूँ | मुझे पता है यह सब कहकर मैं क्या खो रहा हूँ पर चिंता मत कीजिये , खुद को संभल लूँगा | मैंने प्यार किया है और मेरी यही सजा है | वैसे भी इश्क के मारो का दर्द हीं दवा है | आप खुश रहिये |प्रकृति का नियम समझ के भूल जाइए | ये सब इतना आसन नहीं होगा पर आप भी क्या कर सकती है मोर को अपने पंखो की कीमत तो चुकानी हीं पड़ती है |

मैं यह सब आपसे मिल कर कहना चाहता था पर हिम्मत नहीं हुई |इंसान बड़ा स्वार्थी होता है, जानता हूँ कि आप किसी और की हैं फिर भी मेरे मन में ऐसा ख्याल आया | हो सके तो मुझे और मेरे नादान दिल को माफ़ कर दीजिये |

आपका दोस्त
एक पागल प्रेमी

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