आज में सुनहरा कल


आओ इस गुमसुम सफ़र में हँसी का कोई पल ढूंढ लें
इस अंधेरे आज में सुनहरा कल ढूंढ लें,
दो आँसु भी टपके तो मोती बन के,
कोई तो ऐसी जगह ढूंढ लें,
माना कि भरोसा नहीं आपको मेरी वफ़ाओं पर,
पर पास आने की कोई तो वजह ढूंढ लें,
इस गुमसुम सफ़र में हँसी का कोई पल ढूंढ लें
इस अंधेरे आज में सुनहरा कल ढूंढ लें ।

Nishikant Tiwari

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