तेरे प्यार में तब से आज तक 

किशमिश सी जलती मस्तियाँ
लपट- झपट उठता मीठा मीठा धुआँ
ओस से भीगे घास पे धधकते कोयले
फिर भी ठण्ड से काँपती सिकुड़ती वादियाँ !

सिलवटों के सिलसिले में सिमटा हुआ मैं
वो सर्दियों में गर्मियों के दिन गिनता हुआ मैं
अन्घुआया हुआ निहारता तेरी अंगड़ाई
पानी के बुलबुलों सा बनता मिटता हुआ मैं  !

तेरे सम्मोहन से फिर न कभी ना मौसम बदला
कभी मल्हार, कभी बिरहा गाता फिरता पगला
एक धुरि है , नज़रे हैं या छुरी है
घायल दिल पे करती रहतीं है हमला !

आज तक बन्दा बंदी बन नाम तेरा ही रटता
कारे नीरस काग से परिणत हुआ चहकता तोता
निंद्राहीन रातों को उठ उठ कर तेरा रूप निहारते
लड़की है या पारी , आज भी यकीं नहीं होता !!



Hindi romantic love poem - Nishikant Tiwari

Comments

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