हर रात सिसकती बिलखती रह जाती है एक नये सुबह के इन्तज़ार में,
वह सवेरा आता भी है तो बस कुछ वादे करने के लिए ,
छोड़ जाता है सारा दिन आशा के दिए तले जलने के लिए,
शाम होते हीं फ़िर दिन ढल जाता है अपने सारे वादे तोड़ कर एक हीं बार में,
और फ़िर रात सिसकती बिलखती रह जाती है एक नये सुबह के इन्तज़ार में ।
बस इन्तज़ार इन्तज़ार अब और कितना,दिल में घुटन सागर जितना,
गुमसुम है वो,शायद जिन्दगी के मतलब तलाश रही है,
अपनी सांसो का मकसद ढुढने खातिर सारी सारी रात जाग रही है,
क्यों इस कशमकिश के बिना अधुरी है कहानी उसकी,
कोई समझा दे अकसर ऐसा हीं होता है प्यार में ,
हर रात सिसकती बिलखती रह जाती है एक नये सुबह के इन्तज़ार में ।
Nishikant Tiwari
Ads 468x60px
Wednesday, February 27, 2008
Subscribe to:
Comments (Atom)
Aab mai kaya kahu ? हो जज़्बात जितने हैं दिल में, मेरे ही जैसे हैं वो बेज़ुबान जो तुमसे मैं कहना न पाई, कहती हैं वो मेरी ख़ामोशियाँ सुन स...
-
नभ को काले बादलों ने घेर लिया था | दिन भर की गर्मी के बाद मौसम थोड़ा ठंडा हो गया था | मैं हमेशा की तरह अपने छत पर संध्या भ्रमण कर रहा था ...
-
A Lost Love (short story) . . . Is Love Blind ? ... .. . God when the dreams come true when the sky is full of stars and basket full of fl...
-
I was there on window seat, I prayed, I wished, the seat next to me May be occupied by a girl, a beautiful one Sometimes God is too pleased ...